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3 Important Facts About Real And Fake Friends?

आजक हर कोई अपनी ज़िन्दगी में अच्छे दोस्त चाहता है, कुछ को तो बस दोस्त चाहिये फिर चाहे वो कैसा भी हो दोस्तो यह बात कोई मायने नही रखती कि आप दोस्त चाहते हैं! नहीं यह बात मायने रखती है कि आप कैसे दोस्त चाहते हैं।

Real Friends

चलिये ज़्यादा कुछ नही कहूंगा सीधा टोपिक पर आते हैं। यहां पर दोस्तों को लेकर वह बातें आपके सामने आऐंगी जो किसी ओर से आपने अभी तक नहीं सुनी होंगी।मैं यहां पर उन लोगों  की एक अलग फहरिस्त बनाउूंगा जो कि दोस्ती के का़बिल हैं या नही ओर अगर ऐसे दोस्त बन भी जाएं तो आप उनसे क्या उम्मीद रख सकते हैं। देखिये दोस्ती के कईं पहलू होते हैं आज हम इस्से जुड़ी हर बात आपके सामने लाने की कोशिश करेंगे।

1. सही दोस्त और वक़्त पर काम आने वाले दोस्तों की पहचान?

क्या आपने कभी ध्यान दिया कि आप अपने दोस्त को कुछ बता रहे हैं और वोह सुनते सुनते आपकी बात को अन्देखा करदे या फिर कुछ और बात बीच में सुनाने लगे और आपकी बात को ज़्यादा गौर न दे, न आपसे उस बात के बारे में जानने की कोशिश करे जो आप चाहते हैं कि आप उसे कहें और वोह कुछ इसके बारे में अपनी राय दे मगर वो आपकी बात पर कुछ खास ध्यान नही देता इसकी मतलब साफ है कि उसके दिल में आपके लिए कुछ खास जगह नही, इसमें आपकी अपनी कमी भी हो सकती है क्योंकि हो सकता है आपके उस दोस्त को आपके अंदर कुछ कमी दिखायी दी हो जिसकी बिना पर वो आपकी बातों पर कुछ खास ध्यान नही देना चाहता। 

खैर इसका फैसला अब आपके हाथ में है कि आपको किसकी कमी नज़र आती है कभी-कभी ऐसा होता है कि आपको बहुत ही ज़रूरी काम आन पड़ता है जिसमें आप चाहते हैं कि आपका दोस्त आपकी मदद करे, देखो भाई यहां एक बात ज़रूर कहूंगा कि थोडा़ बहुत हाथ तो मतलबी दोस्त भी बटा देते हैं। मगर यहां असली वक़्त पर काम आने की बात चल रही है जिसमें अगर आपका दोस्त आपकी मदद करदे तो आपको इससे बहुत ज़्यादा खुशी मिलती है। और एक अलग छवि अपने दोस्त के बारे में बनती है।

Real Friendship

यही बात आप पर भी लाज़िम आती है इसी situtaion में,ज़रा सोचिये अगर आपके दोस्त ने आपके उस काम को मना कर दिया बावजूद इसके कि वोह आपकी मदद कर सकता था तो उसकी जगह खुद को रख कर देखिये कि कितना नागवार मालूम होता है आप ऐसे दोस्तों की तरह मत बनना।।

अक्सर देखने में आता है कि दो दोस्त साथ में रहने के बावजूद एक दूसरे से लड़ते रहते हैं वो भी ज़रा-ज़रा सी बातों पर क्योंकि हर कोई एक दूसरे से बढ़ जाना चाहता है आगे निकल जाना चाहता है। सबसे पहली बात तो यह है कि दोस्त को समझना उसकी बातों पर ध्यान देना खुद में एक बड़ी बात है,बहुत से ऐसे दोस्त हैं जो साथ में रहते हैं कभी नही लड़ते? पता है क्यों? क्योंकि उनके दिल में एक दूसरे को लेकर सम्मान भरा है।

मगर जब दोस्त लड़ते हैं या तो आपसी दाल न गलने से या फिर किसी ऐसी बात पर जिसको वह समझ न सके,और शुरू हो जाती है तू-तू मैं-मैं! ऐसे दोस्त ज़ख्म ही देते हैं ऐसे लोगों से बात बनाने की कौशिश करनी चाहिये और हो सके आप अपनी बात को रोक कर उसकी बात को चलने दे मगर बात सच्ची होनी चाहिये। और अगर फिर भी आपको लगता है कि ऐसे दाल नही गलने वाली तो भाई मेरी सलाह है कि ऐसे लोगों से मतलब कम रखें। नाता न तोड़े क्योंकि ऐसा हो सकता है कि आपके बुरे वक़्त में वो काम आ जाए।

शअर!!
ज़िन्दगी के बारे में बातें तो बहुत हैं बताने के लिए
मगर कोई दोस्त तो हो सुन्ने-सुनाने के लिए

2. बड़े बुजुर्गों से सीखिये

बड़ों की कद्र

एक खास बात! वो यह कि अपने से बड़े दोस्त की क़द्र करना सीखो। बड़े बूढ़े बुज़रुग भी दोस्त हो सकते हैं। उनसे आप काफी कुछ सीख सकते हैं। और उनके तजुर्बे का आप बखूबी फायेदा उठा सकते हैं। और अगर कोई छोटा दोस्त हो तो उसको समझाओ कि कोई काम कैसे होता है। अगर आप इस बात में शामिल हैं तो खुद समझ सकते हो।

3. फ़र्क़ पड़ता है!

क़द्र करनी शुरू कीजिए अपने उस साथी की जो अक्सर बात पर आपको नसीहत कर देता है! और अफसोस कि आप उसको क्या समझते हैं! आप जो उसको समझते हैं उससे फर्क नही पड़ता। फर्क इससे पड़ता है कि आप उसको कितना एहसास कराते हैं कि आप उसका कितना ख्याल करते हैं।उसकी बातों पर ध्यान देते हैं। फिर चाहे यह आपका दिखावा क्यों न हो मगर एक वक़्त आयेगा जब आपका वह साथी आपके लिए कितना खास हो जाएगा, वक़्त की हवा सबकुछ बदल देती है ।

तो दोस्तों आज के लिए इतना ही काफी है आगे भी हम इंशा अल्लाह दोस्तों के बारे में काफी कुछ जानेंगे और अपने खास दोस्तों को अपनी ज़िंदगी में खास जगह देंगे अपने दोस्तों के लिए वही पसंद करेंगे जो
अपने लिए करते हैं। 

शुक्रिया😊

आपका अपना खास दोस्त!Rao

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